करुण रस की परिभाषा उदाहरण सहित – Karun Ras in Hindi


दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपको हास्य रस की परिभाषा उदाहरण सहित के बारे में पूरी जानकारी बता रहे है | तो चलिए जानते हैं – Karun Ras in Hindi.

करुण रस की परिभाषा

किसी प्रिय वस्तु अथवा प्रिय व्यक्ति आदि के अनिष्ट की अशंका या इनके विनाश से ह्रदय में जो क्षोभ या दुःख उत्पन्न होता है उसे करुण रस कहते है |

करुण रस के उपकरण

  • करुण रस स्थायी भाव – शोक |
  • करुण रस आलम्बन विभाव – विनष्ट व्यक्ति अथवा वस्तु |
  • करुण रस उद्दीपन विभाव – आलम्बन का दाहकर्म, इष्ट के गुण तथा उससे सम्बन्धित वस्तुएँ एवं इष्ट के चित्र का वर्णन |
  • करुण रस अनुभाव – भूमि पर गिरना, नि:श्वास, छाती पीटना, रुदन, प्रलाप, मूर्च्छा, दैवनिन्दा, कम्प आदि|
  • करुण रस संचारी भाव – निर्वेद, मोह, अपस्मार, व्याधि, ग्लानि, स्मृति, श्रम, विषाद, जड़ता, दैन्य, उन्माद आदि |

करुण रस का उदहारण Karun ras ki paribhasha

उदाहरण -1

अभी तो मुकुट बँधा था माथ,
हुए कल ही हल्दी के हाथ,
खुले भी न थे लाज के बोल, खिले थे चुम्बन शून्य कपोल,
हाय रुक गया यहीं संसार,
बना सिन्दूर अनल अंगार,
वातहत लतिका वह सुकुमार,
पड़ी है छिन्नाधार !

उदाहरण -2

प्रिय पति वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है?
दुःख – जलनिधि – डूबी का सहारा कहाँ है?

उदाहरण -3

ब्रज के बिरही लोग दुखारे |

उदाहरण -4

हे जीविवेश ! उठो, उठो यह नींद कैसी घोर है,
है क्या तुम्हारें योग्य, यह तो भूमि – सेज कठोर है|

उदाहरण – 5

सोक बिकल सब रोवहिं रानी|
रुपु सीलु बलु तेजु बखानी||
करहिं विलाप अनेक प्रकारा|
परिहिं भूमि ताल बारहिं बारा|| (तुलसीदास)

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