आधुनिक अंलकार या पाश्चात्य अंलकार : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण


इस आर्टिकल में हम आधुनिक अंलकार या पाश्चात्य अंलकार – Aadhunik Alankar ya Paashchaaty Alankar in Hindi पढेंगे, तो चलिए विस्तार से पढ़ते हैं आधुनिक अंलकार या पाश्चात्य अंलकार परिभाषा, भेद, लक्षण, चिह्न एवं उदाहरण

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आधुनिक/पाश्चात्य अंलकार की परिभाषा

आधुनिक काल में पाश्चात्य साहित्य से आए अलंकारों को ही आधुनिक / पाश्चात्य अलंकार कहते हैं।

आधुनिक / पाश्चात्य अलंकार के भेद—

आधुनिक या पाश्चात्य अलंकारों को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है—

(क). मानवीकरण अलंकार
(ख). ध्वन्यर्थ अलंकार
(ग). विशेषण-विपर्यय अलंकार

(क). मानवीकरण अलंकार की परिभाषा— जहाँ अमानव (प्रकृति, पशु-पक्षी व निर्जीव पदार्थ) में मानवीय गुणों का आरोपण हो, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।

मानवीकरण अलंकार के लक्षण या पहचान चिन्ह— अमानव में मानवीय गुणों का आरोपण ही मानवीकरण अलंकार के लक्षण या पहचान है।

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण—

जगीं वनस्पतियाँ अलसाई, मुख
धोती शीतल जल से।

स्पष्टीकरण— उपर्युक्त उदाहरण में अमानव में मानवीय गुणों का आरोपण किया गया है; अत: यहाँ मानवीकरण अलंकार है।

(ख). ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार की परिभाषा— जहाँ ऐसे शब्दों का प्रयोग हो जिनसे वर्णित वस्तु प्रसंग का ध्वनि-चित्र अंकित हो जाय, वहाँ ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार होता है।

ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार के लक्षण या पहचान चिन्ह— ऐसे शब्दों का प्रयोग जिनसे वर्णित वस्तु प्रसंग का ध्वनि-चित्र अंकित हो जाए अथवा हो जाता है वही ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार की पहचान होता है।

ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार के उदाहरण— चरमर-चरमर-चूँ-चरर-मरर जा रही चली भैंसा गाड़ी।

स्पष्टीकरण— प्रस्तुत उदाहरण में ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ है जिनसे वर्णित वस्तु प्रसंग का ध्वनि-चित्र अंकित हो रहा है अत: यहाँ ध्वन्यर्थ व्यंजना अलंकार है।

(ग). विशेषण-विपर्यय अलंकार की परिभाषा— जहाँ विशेषण का विपर्यय कर दिया जाता है अर्थात् स्थान बदल दिया जाता है वहाँ विशेषण-विपर्यय अलंकार होता है।

विशेषण-विपर्यय अलंकार के लक्षण या पहचान चिन्ह— विशेषण का विपर्यय कर देना अथवा स्थान बदल देना ही विशेषण-विपर्यय अलंकार के पहचान चिन्ह हैं।

विशेषण-विपर्यय अलंकार के उदाहरण—

इस करुणाकलित हृदय में,
अब विकल रागिनी बजती है।

स्पष्टीकरण— यहाँ विकल विशेषण रागिनी के साथ लगाया गया है जबकि कवि का हृदय विकल हो सकता है रागिनी नहीं।


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